सबसे दर्दनाक बात यह है कि शिवराम के पीछे महज 4 माह का मासूम बच्चा है। पिता की मौत के बाद मासूम के सिर से पिता का साया उठ गया है, वहीं परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। परिजनों का कहना है कि शिवराम परिवार का मुख्य सहारा था और अब परिवार को उसके भविष्य की चिंता सता रही है।प्रदर्शनकारियों ने कार्यस्थल पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आखिर कर्मचारी को किस परिस्थिति में रायपुर भेजा गया था और काम के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम थे, इसकी जांच होनी चाहिए।
फिलहाल परिजन न्याय और उचित मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं पूरे मामले में मुरारकरा ब्रदर्स और तिरुपति मोटर्स प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही हादसे की जिम्मेदारी और परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी
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