जांजगीर-चांपा, 05 अक्टूबर 2026। खेती में फसल विविधीकरण और नवाचार अपनाकर किसान अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। नवागढ़ विकासखंड के ग्राम महंत निवासी कृषक श्री आशीष राठौर, पिता श्री द्वारिका प्रसाद ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और समेकित उद्यानिकी विकास योजना का लाभ लेकर इसका सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। पारंपरिक रूप से धान की खेती करने वाले आशीष राठौर ने 1 हेक्टेयर भूमि में फलदार पौधों और अंतरवर्तीय फसलों की मिश्रित खेती अपनाकर पहली ही वर्ष में लगभग 3.65 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी अर्जित की।
उन्होंने बताया कि विभागीय मार्गदर्शन से प्रेरित होकर अपनी 1 हेक्टेयर भूमि में मिश्रित फलदार पौधों की खेती शुरू की। उन्होंने खेत में अमरूद, नींबू, आम, मुनगा और पपीता के पौधे लगाए। इसके साथ ही पौधों के बीच उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग करते हुए अंतरवर्तीय फसलों के रूप में हल्दी, अदरक, टमाटर, आलू, भिंडी और जिमीकंद का उत्पादन किया। इस तरह एक ही खेत से विभिन्न फसलों के माध्यम से आय के कई स्रोत तैयार हुए। इस प्रयोग का लाभ उन्हें पहली ही वर्ष में मिला। अंतरवर्तीय फसलों से लगभग 2 से 2.55 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त हुई। वहीं, हल्दी और मुनगा का पाउडर तैयार कर विक्रय करने से करीब 1.10 लाख रुपये की अतिरिक्त आय हुई। इस प्रकार श्री राठौर को कुल मिलाकर लगभग 3.65 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी प्राप्त हुई।
समेकित उद्यानिकी विकास योजना के अंतर्गत श्री राठौर को फेंसिंग, बोर, वर्मीटांका तथा अंतरवर्तीय फसल के लिए अनुदान के रूप में विभागीय सहयोग भी प्राप्त हुआ। योजना के साथ मिले तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग से उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मिश्रित एवं लाभकारी खेती अपनाने में मदद मिली। श्री राठौर ने यह साबित किया है कि फसल विविधीकरण, अंतरवर्तीय खेती और कृषि उपज के प्रसंस्करण को अपनाकर सीमित भूमि से भी बेहतर आमदनी के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उनकी यह सफलता खेती में नवाचार और बढ़ती कृषि आय की एक प्रेरक सेवा की कहानी है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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