योजना के तहत प्रतिमाह खाते में मिलने वाली राशि को उन्होंने खर्च करने के बजाय बचत करना शुरू किया। कुछ समय बाद इसी राशि का उपयोग कर उन्होंने श्रृंगार सामग्री की दुकान ‘श्रृंगार सदन’ की शुरुआत की। छोटे स्तर से शुरू किया गया यह व्यवसाय अब उनके लिए आय का एक नया साधन बन गया है। आज लागत एवं अन्य खर्चों को घटाने के बाद सुमित्रा को इससे लगभग 2 हजार रुपये से अधिक प्रतिमाह आय हो रही है। इस आमदनी से वह परिवार और बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में पति के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।
श्रीमती सुमित्रा बताती हैं कि उनके इस प्रयास की परिवार और गांव में सराहना हो रही है। उनके आत्मनिर्भर बनने के प्रयास से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं और अपने स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित हो रही हैं। महतारी वंदन योजना से मिली सहायता को सुमित्रा ने केवल घरेलू खर्च तक सीमित न रखते हुए उसे अपने व्यवसाय की शुरुआत का आधार बनाया।
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